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Sunday, October 7, 2018

प्रमुख मेट्रोपोलिटन एरिया नेटवर्क

इसका पूरा नाम Metropolitan Area Network हैं यह एक ऐसा उच्च गति वाला नेटवर्क है जो आवाज, डाटा और इमेज को 200 मेगाबाइट प्रति सेकंड या इससे अधिक गति से डाटा को 75 कि.मी. की दूरी तक ले जा सकता है। यह लेन (LAN) से बड़ा तथा वेन (WAN) से छोटा नेटवर्क होता है। इस नेटवर्क के द्वारा एक शहर को दूसरे शहर से जोड़ा जाता है।
इसके अंतर्गत दो या दो से अधिक लोकल एरिया नेटवर्क एक साथ जुड़े होते हैं। यह एक शहर के सीमाओ के भीतर का स्थित कंप्यूटर नेटवर्क होता हैं। राउटर, स्विच और हब्स मिलकर एक मेट्रोपोलिटन एरिया नेटवर्क का निर्माण करता हैं। मेट्रोपोलिटन एरिया नेटवर्क वृहद स्तरीय नेटवर्क है जो कई कॉरपोरेट लोकल एरिया नेटवर्क को एक साथ जोड़ते हैं। मेट्रोपोलिटन एरिया नेटवर्क किसी एक संगठन के द्वारा खरीदा नहीं होता है बल्कि इनके संचार संयंत्र तथा उपकरण किसी एक समूह या एक नेटवर्क प्रदाता द्वारा मेंटेन किया जाता है जो अपने कॉरपोरेट ग्राहकों को इसकी सीमाएं बेचते हैं। मेट्रोपोलिटन एरिया नेटवर्क प्रायः उच्च गति नेटवर्क के रूप में कार्य करता है तथा क्षेत्रीय संसाधनों के साझीदारी सहायता करते हैं। ( स्त्रोत - wiki )

 1. डेलनेट (दिल्ली लाइब्रेरी नेटवर्क) स्थापना वर्ष 1988 तथा 1992 में सोसाइटी के रूप में पंजीकृत किया गया।
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र , सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और इंडिया नेशनल सेंटर नई दिल्ली द्वारा प्रसारित है इसका प्रमुख उद्देश्य लाइब्रेरी प्रणाली का विकास कर के पुस्तकालयों के बीच संसाधनों का मिलजुलकर प्रयोग सुनिश्चित करना है।







2. बॉम्बे नेट (बॉम्बे लाइब्रेरी नेटवर्क) स्थापना वर्ष 1994 इसकी स्थापना राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी केंद्र मुंबई (एनसीएसटी) द्वारा किया गया इसका उद्देश्य कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी का प्रमुख ग्रंथ सूची डेटाबेस तैयार करना तथा मुंबई के विभिन्न पुस्तकालयों में उपलब्ध पत्रिकाओं का यूनियन कैटलॉग बनाना है।



3. कैलीबनेट( कोलकाता  लाइब्रेरी नेटवर्क) की स्थापना निसैट द्वारा 1994 में की गई इसका प्रमुख उद्देश्य कंप्यूटर आधारित पुस्तकालय स्वचालन और नेटवर्किंग के जरिए कोलकाता के संस्थागत पुस्तकालयों के सामूहिक हितों की पूर्ति करना।





4. एडमिन अट अहमदाबाद लाइब्रेरी नेटवर्क जिसकी स्थापना  निस्सएट द्वारा 1995 में की गई इसका मुख्य उद्देश्य अमदाबाद की 150 से अधिक पुस्तकालय और सूचना केंद्रों के बीच सहकारी कार्यप्रणाली को विकसित करना है



भारत में विकसित सुपर कंप्यूटर

सुपर कम्प्यूटर                 -       निर्माण करने वाली संस्था

1.फ्लोसोलवर MK3        -   राष्ट्रीय वैमानिकी प्रयोगशाला बैंगलोर

2. पेस     -         एडवांस्ड न्यूमेरिकल रिसर्च एंड एनालिसिस ग्रुप हैदराबाद


3. टेरा फ्लॉप   -     भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र

4. मल्टी माइक्रो  -    भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु


5. माख   -           भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई

6. परम      -       सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग ( सीडैक )पुणे


7. परम 10000 -       सीडैक पुणे

8.  परम आनंद -      सीडैक पुणे

9.परम पदम   -     सीडैक पुणे

10. कब्रु       -     आई एम एस

Thursday, May 31, 2018

Computer parts full form

AC     :   Alternating Current

ACPI   :   Advanced Configuration and Power Interface

AGP    :   Accelerated Graphics Port

AMD   :   Advanced Micro Devices

AMR   :   Audio Modem Riser

APM   :  Advanced Power Management

ASR   :  Automated System Recovery

AT     :  Advanced Technology

ATA   :   Advanced Technology Attachment

ATAPI  :  Advanced Technology Attachment Packet Interface

BIOS   :  Basic Input Output System

BRD-BD : BLU-RAY Disc

CD  :  Compact Disc

CMOS  :  Complementary Metal-Oxide Semiconductor

CPU   :  Central Processing Unit

CRT   :  Cathode Ray Tube.

DAT   :  Digital Audio Tape.

DRAM : Dynamic Random Access Memory

DVD   :  Digital Versatile Disc

DVD-R :  Digital Video Disc-Recordable

DVD-RW  :  Digital Video Disc-Rewritable

FAT   :  File Allocation Table

IC    :  Integrated Chip

LCD  :  Liquid Crystal Display

LED  :  Light Emitting Diode

MDA  :  Monochrome Display Adapter

MMC  :  Multi-Media Card

NIC    :  Network Interface Card

NTFS :  New Technology File System

OCR  :  Optical Character Recognition

OEM  :  Original Equipment Manufacturer

OMR  :  Optical Mark Recognition

OS    :  Operating System

PC     :  Personal Computer

PDA   :  Personal Digital Assistant

RAID  : Redundant Array of Independent Discs

RAM  :  Random Access Memory

ROM  :  Read Only Memory

SATA :  Serial Advanced Technology Attachment

SD     : Secure Digital

UPS   :  Uninterrupted Power Supply

USB   :  Universal Serial Bus

UTP   :   Unshielded Twisted Pair cable

VDT   :  Visual Display Terminal

VDU   :  Visual Display Unit

VGA   :  Video Graphics Array

VLSI   :  Very Large Scale Integration



Full Forms of Keyboard`s Keys Abbreviations :

ALT    :  ALTERNATE

CTRL  :  CONTROL

DEL    :  DELETE

ESC    :  ESCAPE

FN      :  FUNCTION

INS     :  INSERT

NUM LOCK : NUMBER LOCK
PgDn   :  PAGE DOWN
PgUp   :  PAGE UP
PrtScn=Prt Scr=Print Scrn=Prt Scn=Prt Sc=Prt Scrn=Prnt Scrn : PRINT SCREEN
ScrLk    : SCROLL LOCK
SysRq   : SYSTEM REQUEST



Memory Units :


bit  = Binary digit   
Byte = B   
KiloByte    =  KB   
MegaByte  =  MB   
GigaByte   =  GB
TeraByte   =  TB   
PetaByte   =  PB   
ExaByte    =  EB   
ZettaByte  = ZB 
YottaByte  = YB



Internet or Networking Terms :


AM/FM    :    Amplitude/FrequencyModulation.
AP          :   ACCESS POINT
APIPA     :   Automatic Private Internet Protocol Addressing
ARP        :   Address Resolution Protocol
ARPANET :    Advanced Research Project Agency
ASP        :    ACTIVE SERVER PAGES
CDMA     :    Code Divison Multiple Access.
CSS       :   Cascading Style sheet
DL         :   DOWNLOAD
DMCA    :   Digital Millenium Copyright Act
DNS      :   Domain Name System
EDGE    :   Enhanced Data Rate for GSM
E-MAIL  :   Electronic Mail
GPRS    :   General Packet Radio Service.
GSM      :   Global System for Mobile Communication.
HSDPA  :   High Speed Downlink Packet Access.
HTML    :   HYPERTEXT MARKUP LANGUAGE
HTTP     :  HYPERTEXT TRANSFER PROTOCOL
HTTPS   :  HYPERTEXT TRANSFER PROTOCOL SECURE
INFO     :   INFORMATION
IP         :   Internet Protocol
IPV4     :   INTERNET PROTOCOL VERSION 4
IPV6     :   INTERNET PROTOCOL VERSION 6
ISP       :   Internet Service Provider
LAN      :   LOCAL AREA NETWORK
MMS     :   MULTIMEDIA MESSAGING SERVICE
NAT      :   NETWORK ADDRESS TRANSLATION
PHP       :  HYPERTEXT PREPROCESSOR
PR        :   PAGE RANK
RSS      :  REALLY SIMPLE SYNDICATION
SEO      :  SEARCH ENGINE OPTIMIZATION
SIM      :   Subscriber Identity Module.
SMS     :   SHORT MESSAGE SERVICE
SQL     :    STRUCTURED QUERY LANGUAGE
TCP     :    Transmission Control Protocol .
UHF     :    Ultra High Frequency.
UL       :    UPLOAD
UMTS   :   Universal Mobile

Telecommunication System

URL     :   Uniform or Universal Resource Locator
VHF     :   Very High Frequency.
VIRUS  :   Vital Information Resource Under Siege
VOIP    :   Voice Over Internet Protocol
WAP    :   Wireless Application Protocol.
WI-FI   :   WIreless FIdelity
WLAN  :   Wireless Local Area Network
WWW  :   World Wide Web
XML     :   eXtensible Markup Language


Most Common Domains :


.BIZ   :  BUSINESS
.COM  :  COMMERCIAL
.EDU  :  EDUCATIONAL
.GOV  :  GOVERMENTAL
.IN     :  INDIA
.INFO :  INFORMATION
.NET  :  NETWORK
.ORG :  ORGANIZATION
.UK   :  UNITED KINGDOM
.US   :  UNITED STATE
TLD  :  TOP-LEVEL DOMAIN


Mostly used Extensions :


3GP    : 3rd Generation Project
3GPP  : 3rd Generation Partnership Project
AAC   : Advanced Audio Coding
AMR   : Adaptive Multi-Rate Codec
AVI    : Audio Video Interleave
BMP   : Bitmap
DOC  : Document
DVX  : DivX Video
GIF   : Graphic InterchangeableFormat
JAD  : Java Application Descriptor
JAR  : Java Archive
JPEG : Joint Photographic Expert Group
M3G  : Mobile 3D Graphics
M4A  : MPEG-4 Audio File
MP3  :  Moving Picture Experts Group Phase  PHASE 3 (MPEG-3)
MP4   : MPEG-4 video file
MPEG : Moving Picture Experts Group  (MPEG)
MPEG 1 :  Moving Picture Experts Group  PHASE 1 (MPEG-1)
MPEG 2 :  Moving Picture Experts Group Phase  PHASE 2 (MPEG-2)
PDF  :  Portable Document Format
PNG  :  Portable Network Graphics
RTS  :  Real Time Streaming
SIS  :   Symbian OS Installer File
SWF  :  Shock Wave Flash
TXT   :  Text
WAV  :  Waveform Audio
WBMP : Wireless Bitmap Image
WMA   : Windows Media Audio
WMP   : Windows Media Player
WMV   : Windows Media Video

कम्प्यूटर का फूल फॉर्म हिंदी में

Full form of Computer

C – Common
O – Oriented
M – Machine
P – Particularly
U – United and used under
T – Technical and
E – Educational
R –  Research


हिंदी -

C – समान्य
O – ओरिएंटेड
M – मशीन
P – विशेष रूप से
U – संयुक्त और इसके तहत इस्तेमाल किया
T – तकनीकी और
E – शैक्षिक
R –  अनुसंधान


Thursday, February 8, 2018

सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट CPU

सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट

CPU कम्प्यूटर का दिमाग है जो व्याख्या और अनुदेश को क्रियान्वित करता है। आम तौर पर यह वर्गाकार अथवा आयताकार होता है जिसे मदरबोर्ड में फिट करने के लिए कोने नोकदार होते है।

इसे माइक्रोप्रोसेसर या प्रोसेसर के नाम से भी जाना जाता है। 
गणित और तार्किक कार्य को करने की क्रिया को प्रोसेसिंग कहते हैं।

CPU मेमोरी यूनिट से डाटा और निर्देश लेता है और निर्देश के अनुसार गणना करते हुए उसे उपयोगी डाटा के रूप में व्यवस्थित कर पुनः मेमोरी यूनिट में भेज देता है।

यह डाटा व निर्देश मेमोरी यूनिट को इनपुट यूनिट से प्राप्त होते हैं।

CPU प्रोग्राम के कोड को डिकोड कर के निर्देशों को प्रोसेस करता है।

CPU का मुख्य कार्य फेच करना , डिकोड करना, निष्पादित करना ,और परिणाम को वापस लिखना।

CPU के दो कार्य ब्लाक होते हैं।

1 कंट्रोल यूनिट (CU)- यह  सभी प्रोसेस सिग्नलों को  कंट्रोल करती हैै। सभी प्रकार के इनपुट और आउटपुट  फ्लो का  निर्देशन  करती  है यह माइक्रो प्रोग्राम से कोड लेकर प्रोसेस करके सभी यूनिट   को निर्देश भेजती है ।



2 अर्थ मेटिक और तार्किक यूनिट ( ALU) - यह गणित और तार्किक कार्य करता है।
गणितीय कार्यो में जोड़, घटना, गुणा, भाग आदि करता है।

तार्किक कार्यो में अक्षरों को पहचान कर उनकी तुलना करना।





Wednesday, February 7, 2018

कम्प्यूटर का परिचय विडियो

कम्प्यूटर का परिचय

कम्प्यूटर एक मशीन हैं जो निर्देशो के एक सेट पर कार्य अथवा गणना करता है।
कम्प्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हैं जो इनपुट उपकरण से डाटा प्राप्त करता है और निर्देशो के अनुसार उस पर गणना करता है और डाटा को आउट पुट उपकरणों द्वारा वांछित सूचना प्रदान करता है।


कम्प्यूटर शब्द लैटिन भाषा के computare से लिया गया जिसका अर्थ होता है गणना करना।
मूल रूप से इसका अविष्कार तीव्र गति से गणना करने के लिए किया गया था।

कम्प्यूटर के प्रमुख अवयव

1 सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट ( C P U)
2 मेमोरी यूनिट
3 इनपुट यूनिट
4 आउटपुट यूनिट


1 सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट - यह कम्प्यूटर  का  केन्द्र होता है   cpu ही निर्देश  को निष्पादित करती है

C P U के मुख्य भाग है

1 कंट्रोल यूनिट ( C U )
2 अर्थमेटिक लॉजिकल यूनिट ( A L U)

कंट्रोल यूनिट - सभी भागों में होने वाले संचालन को नियंत्रित करता है
अर्थ मेटिक लॉजिकल यूनिट - ALU प्रोग्राम में होने वाले सभी अंकगणितिय और तार्किक  कार्यो को निष्पादित करता है।

2 मेमोरी यूनिट -मेमोरी वह उपकरण है जिसमे कम्प्यूटर का डाटा और प्रोग्राम को संरक्षित   किया जाता  है।

यह 2 प्रकार का होता है
1 प्राथमिक मेमोरी ( आंतरिक मेमोरी)
2 माध्यमिक मेमोरी ( बाहरी मेमोरी)


3 इनपुट यूनिट - इनपुट यूनिट का प्रयोग उपयोग  कर्ता द्वारा कम्पप्यूट  में डाटा  उपलब्ध कराने के लिए  किया जााता है।
की बोर्ड, माउस, जॉय स्टिक , टच स्क्रीन, स्कैनर, लाइटपेन आदि कुछ इनपुट डिवाइस है।


4 आउटपुट यूनिट - इस यूनिट द्वारा उत्पन्न परिणाम  दिखाए  जााते है ।
मॉनिटर, प्रिंटर, सपीकर, आदि आउटपुट डिवाइस है।
     





कम्प्यूटर के अनुप्रयोग

कम्प्यूटर के अनुप्रयोग

डाटा प्रोसेसिंग (Data processing) - बडें और विशाल पैमाने पर डाटा प्रोसेसिंग (Data processing) करने के लिये और सूचना तैयार करने के लिये कंप्‍यूटर का प्रयोग किया जाता है इससे डाटा इकठ्ठा करना उसका विश्‍लेशण करना और सूचना प्राप्‍त करना बहुत आसान हो जाता है



शिक्षा (Education) - कंप्‍यूटर में आधुनिक शिक्षा की तस्‍वीर ही बदल दी है, आज इन्टरनेट के मध्यम से हम किसी भी विषय की जानकारी कुछ ही क्षणों में प्राप्त कर सकते हैं, स्‍कूल और कॉलेजों को भी इंंटरनेट से जोड दिया गया है तथा कई जगहों पर स्‍मार्ट क्‍लास पर जोर दिया जा रहा है जो कंप्‍यूटर की वजह से ही संभव है


बैंक (Bank)- बैंकिंग क्षेत्र में तो कम्प्यूटर के उपयोग ने क्रांति ही ला दी है, पुराने जमाने के बही खाते और रजिस्‍टर की जगह कंप्‍यूटर ने ले ली है बैंकों के अधिकांश कार्य कंप्‍यूटर के माध्‍यम से ही हो रहे हैं जैसे पैसे निकालना और जमा करना, यहां तक कि रूपया गिनने के ि‍लिये भी कंंम्‍यूटरीक्रत मशीने उपलब्‍ध हैं


संचार (Communication)- 4जी इंटरनेट को आज बच्‍चा-बच्‍चा प्रयोग कर रहा है कंप्‍यूटर तकनीक ने ही संचार के क्षेत्र में इन्टरनेट के प्रयोग को अम्भव बनाया है और इन्टरनेट ने संचार क्रांति को जन्म दिया


मनोरंजन (Recreation)- मल्टीमिडिया के प्रयोग ने तो कम्प्यूटर को बहुयामी बना दिया है, कम्प्यूटर का प्रायः सिनेमा, टेलीविजन, वीडियो गेम खेलने के लिये भी किया जाता है


प्रशासन (Governance) - हर एक संस्थान में अपना एक आंतरिक प्रशासन होता है और प्रशासनिक कार्य कम्प्यूटर से ही किये जाते हैं, साथ ही साथ सरकारी योजनओं का लाभ भी ई-शासन (E-governance) के रूप में आज जनों के घराेें तक पहुॅच रहा है


सुरक्षा (Security)- आज बिना कम्प्यूटर के हमारी सुरक्षा व्यवस्था बिलकुल कमजोर हो जाएगी | एयरक्राफ्ट ट्रैक करने में, हवाई हमले, सीसीटीवी कैमरे में कम्प्यूटर का उपयोग होता है

वाणिज्य (Commerce) - दुकान, बैंक, बीमा, क्रेडिट कंपनी, आदि में कम्प्यूटर का अधिकतम उपयोग होता है | कम्प्यूटर के बिना काम करना वितीय दुनिया के लिए असंभव हो गया है


उद्योग (Industry)- बहुत सारे औधोगिक संस्थान; जैसे – स्टील, कैमिकल, तेल कंपनी आदि कम्प्यूटर पर निर्भर हैं | संयंत्र प्रक्रियाओं के वास्तविक नियंत्रण के लिए भी कम्प्यूटर का उपयोग करते हैं


चिकित्सा (Medicine) - चिकित्सा के क्षेत्र में कम्प्यूटर का अनुप्रयोग विभिन्न शारीरिक रोगों का पता लगाने के लिए किया जाता है, रोगों का विश्लेषण और निदान भी कम्प्यूटर के द्वारा संभव है, आधुनिक युग में एक्स रे, सिटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड इत्यादि विभिन्न क्षेत्र में कम्प्यूटर का व्‍यापक उपयोग हो रहा है


Tuesday, February 6, 2018

कम्प्यूटर का वर्गीकरण

कम्प्यूटर की पीढियां


ZUSE-Z3 एवं ENIAC को कम्प्युटर के विकास का आधार मानें तो तब से लेकर अब तक कम्प्युटर विकासक्रम में कई पड़ाव आए, सर्वाधिक महत्त्वपूर्णता के आधार पर अबतक कंप्यूटर की कुल पाँच पीढियाँ हुई हैं|

विज्ञान के क्षेत्र में हो रहे अविष्कार कम्प्युटर के प्रगति पथ में बहुत सहयोगी रहे हैं| हर पीढ़ी में कम्प्युटर की तकनीकी एवं कार्यप्रणाली में कई आश्चर्यजनक एवं महत्त्वपूर्ण आविष्कार हुए, जिन्होंने कम्प्युटर तकनीकी की काया पलट कर दी| हर पीढ़ी के बाद कम्प्युटर की आकार-प्रकार, कार्यप्रणाली एवं कार्यक्षमता में सुधार होते गए| कम्प्युटर का विकास दो महत्वपूर्ण भागों में साथ-साथ विकास हुआ, एक तो आतंरिक संरचना एवं हार्डवेयर, और दूसरा सॉफ्टवेर, दोनों एक दुसरे पर निर्भर होने के साथ ही साथ एक दुसरे के पूरक भी हैं| जैसे-जैसे पीढ़ी दर पीढ़ी कम्प्यूटर क्षेत्र में तरक्की हुई उनकी मांग भी बढ़ने लगी और वे पहले की अपेक्षा सस्ते भी होते गए, आज कम्प्युटर घर-घर में पहुंचनें की वजह उनका किफायती होना ही है|

कम्प्युटर के पीढियों की कुछ आधारभूत जानकारी इस प्रकार है,



(1) पहली पीढ़ी (1941 से 1954) [आधार - वैक्युम ट्यूब]:
अपने समय के ये सर्वाधिक तेज कम्प्यूटर थे| कम्प्युटर की संरचना में कई हजार वक्क्यूम ट्यूब का मुख्य रूपसे इस्तेमाल किया गया|
जिस वजह से इनके द्वारा बिजली की खपत बहुत अधिक होती थी|
कई हजार वक्क्यूम ट्यूब का इस्तेमाल होने के कारण अत्याद्धिक उर्जा उत्पन्न होती थी|
वैक्यूम ट्यूब में उपयोग में लिए जाने वाले नाज़ुक शीशे के तार अधिक उर्जा से शीघ्र ही जल जाते थे| इनके बाकि कलपुर्जे जल्दी ही ख़राब हो जाते जिससे उन्हें तुंरत बदलना पड़ता था, इनके रख रखाव पर विशेष धयान देना पड़ता था|
जिस वजह से इन्हे जहाँ कहीं स्थापित किया जाता था वहाँ सुचारू रूप से वताकुलन की व्यवस्था करनी पड़ती थी|
RAM के मैमरी लिए विद्युतचुम्बकीय प्रसार (Relay) का उपयोग किया गया|
ये मशीनी भाषा पर निर्भर होते थे, जो निम्नतम स्तर के प्रोग्रामिंग भाषा के निर्देशों के आधार पर कार्य करते थे|
इनके उपयोग के लिए उपयुक्त निर्देश (PROGRAM) लिखना बेहद ही जटील होता था जिस वजह से इनकाव्यावसायिक उपयोग कम होता था|
इनपुट के लिए इनमें पंचकार्ड एवं पेपरटेप का उपयोग किया जाता था, और आउटपुट प्रिंटर के द्वारा प्रिंट कियाजाता था|
इनका आकार बहुत बड़ा होता था, जिस कारण इन्हें बड़े-बड़े कमरों में रखा जाता था, जिस वजह से इनका उत्पादन लागत बहुत ही अधिक था|

ZUSE-Z3, ENIAC, EDVAC, EDSAC, UNIVAK, IBM 701 आदि मशीन प्रमुख रहे|






(2) दूसरी पीढ़ी (1955 से 1964) [आधार - ट्रांजिस्टर]:
सन् 1947  में Bell Laboratories नें 'ट्रांजिस्टर' नामक एक नई switching device का आविष्कार किया जो इस पीढी के लिए वरदान से कम नहीं था|
ट्रांजिस्टर Germanium Semiconductor पदार्थ से बनते थे जिससे इनका आकार काफी छोटा होता था, परिणाम स्वरूप वैक्युम ट्यूब की जगह Switching device का उपयोग होने लगा|
ट्रांजिस्टर की स्विचिंग प्रणाली बेहद तीव्र थी, जिससे उनकी कार्यक्षमता वैक्युम ट्यूब के मुकाबले बेहद तीव्रहोती थी|
हालांकि प्रथम पीढी के मुकाबले इनसे कम उर्जा निकलती थी फिर भी ठंडक बनाये रखने के लिए वातानुकूलनकी व्यवस्था अब भी जरुरी था|
इनकी मैमरी में विद्युतचुम्बकीय प्रसार की जगह चुम्बकीय अभ्यंतर का उपयोग हुआ, जिससे निर्देशों को मैमरी में ही स्थापित करना हुआ| प्रथम पीढी के मुकाबले इनकी संचयन क्षमता कहीं ज्यादा थी|
गूढ़ मशीनी भाषा की जगह इनमें उपयोग के लिए सांकेतिक\असेम्बली भाषा का उपयोग हुआ, जिससे निर्देशोंको शब्दों में दर्ज करना सम्भव हुआ|
COBOL, ALGOL, SNOBOL, FORTRAN जैसे उच्चस्तरीय प्रोगामिंग भाषा तथा क्रमागत प्रचालन तंत्र (Batch Operating System) इसी दौरान अस्तित्व में आए|
इनका उत्पादन लागत कम हुआ, फलस्वरूप इनका व्यावासिक उपयोग औसत दर्जे का होने लगा|






(3) तीसरी पीढ़ी (1965से 1974) [आधार - इंटीग्रेटेड सर्किट-IC]:
यह चरण कम्प्युटर के विकास में बेहद ही रोमांचकारी रहा, अब तक के विकास पथ पर इतनि क्रांति पहले कभी नहीं आयी थी| इंटिग्रेटेड सर्किट IC, जो की कई सारे ट्रांसिस्टर्स, रेसिस्टर्स तथा कैपसीटर्स इन सबको एक ही सिलिकोन चिप पर इकठ्ठे स्थापित कर बनाये गए थे, जिससे की तारों का इस्तेमाल बिलकुल ही ख़त्म हो गया|
परिणामस्वरूप अधिक उर्जा का उत्पन्न होना बहुत ही घट गया, परन्तु वताकुलन की व्यवस्था अब भी जरुरी बना रहा|
लगभग 10 इंटिग्रेटेड सर्किटों को सिलिकोन की लगभग 5 मिमी सतह पर इकठ्ठे ही स्थापित करना संभव हुआ, इसलिए IC को "माइक्रोइलेक्ट्रोनिक्स" तकनीकी के नाम से भी जाना जाता है|इसे "स्माल स्केल इंटीग्रेशन" (SSI) जाना जाता है| आगे जाकर लगभग 100इंटिग्रेटेड सर्किटों को सिलिकोन चिप की एक ही सतह पर इकठ्ठेही स्थापित करपाना संभव हुआ, इसे मीडियम स्केल इंटीग्रेशन (MSI) जाना जाता है|
तकनीकी सुधारे के चलते इनकी मैमरी की क्षमता पहेले से काफी बढ़ गयी, अब लगभग 4 मेगाबाईट तक पहुँचगयी| वहीँ मग्नेटिक डिस्क की क्षमता भी बढ़कर 100 मेगाबाईट प्रति डिस्क तक हो गयी|
इनपुट के लिए कुंजीपटल का एवं आउटपुट के लिए मॉनिटर का प्रयोग होने लगा|
उच्चस्तरीय प्रोगामिंग भाषा में सुधार एवं उनका मानकीकरण होने से एक कम्प्युटर के लिए लिखे गए प्रोग्राम को दुसरे कम्प्युटर पर स्थापित कर चलाना सम्भव हुआ| FORTRAN IV, COBOL, 68 PL/1 जैसे उच्चस्तरीय प्रोगामिंग भाषा प्रचलन में आये|
इनका आकर प्रथम एवं द्वितीय पीढी के कम्प्युटर की अपेक्षा काफी छोटा हो गया|
जिससे मेनफ्रेम कम्प्युटर का व्यावासिक उत्पादन बेहद आसान हो गया और इनका प्रचलन भी बढ़ने लगा| इनके लागत में भी काफी कमी हुयी| जिसके परिणाम स्वरूप ये पहले के मुकाबले बेहद सस्ते हुए|







(4 ) चौथी पीढ़ी (1975 से 1989) [आधार: मैक्रोप्रोसेसर चिप - VLSI]:
माइक्रोप्रोसेसर के निर्माण से कम्प्युटर युग का कायापलट इसी दौर में शुरू हुआ, MSI सर्किट का रूपांतर LSI एवं VLSI सर्किट में हुआ जिसमे लगभग 5000ट्रांसिस्टर एक चिप पर इकठ्ठे स्थापित हुए|
तृतीय पीढ़ी के कम्प्युटर के मुकाबले इनकी विद्युत खपत बेहद घट गयी| एवं इनसे उत्पन्न होने वाली उर्जा भी कम हुयी| इस दौर में वताकुलन का इस्तेमाल अनिवार्य नहीं रहा|
इनके मैमरी में चुम्बकीय अभ्यंतर की जगह सेमीकंडक्टर मैमरी कण प्रयोग होने लगा, जिससे इनकी क्षमता में बहुत वृद्धि हुयी| हार्ड डिस्क की क्षमता लगभग 1 GB से लेकर 100 GB तक बढ़ गयी|
माइक्रोप्रोसेसर तथा मैमरी के अपार क्षमता के चलते, इस दौर के कम्प्युटर की कार्य क्षमता बेहद ही तीव्र हो गयी|
इस दौर में C भाषा चलन में आयी जो आगे चलकर C ++ हुयी, इनका उपयोग मुख्यरूप से होने लगा| प्रचालन तंत्र (Operating System) में भी काफी सुधार हुए, UNIX, MS DOS, apple's OS, Windows तथा Linux इसी दौर से में चलन में आये|
कम्प्युटर नेटवर्क ने कम्प्युटर के सभी संसाधनों को एक दुसरे से साझा करने की सुविधा प्रदान की जिससे एक कम्प्युटर से दुसरे कम्प्युटर के बिच जानकारियों का आदान-प्रदान संभव हुआ|
पर्सनल कम्प्युटर तथा पोर्टेबल कम्प्युटर इसी दौर से चलन में आया, जो की आकार में पिछली पीढी के कम्प्युटर से कहीं अधिक छोटा, परन्तु कार्यशक्ति में उनसे कहीं ज्यादा आगे था|
इनका उत्पादन लागत बेहद ही कम हो गया जिससे इनकी पहुँच आम लोगों तक संभव हुयी|





(5 ) पांचवीं पीढ़ी (1990से अब तक [आधार: ULSI]):
माइक्रोप्रोसेसर की संरचना में VLSI की जगह UVLSI चिप का प्रयोग होने लगा| माइक्रोप्रोसेसर की क्षमता में आश्चर्यजनक रूप से ईजाफा हुआ, यहाँ तक की 4 से 8 माइक्रोप्रोसेसर एक साथ एक ही चिप में स्थापित होने लगे, जीससे ये अपार शक्तिशाली हो गए हैं|
इनकी मेमरी की क्षमता में भी खूब ईजाफा हुआ, जो अब तक बढ़कर 4 GB से भी ज्यादा तक हो गयी है| हार्ड डिस्क की क्षमता 2 टेरा बाईट से भी कहीं ज्यादा तक पहुच गयी है|
इस दौर में मेनफ्रेम कम्प्युटर पहले के दौर के मेनफ्रेम कम्प्युटर से कई गुना ज्यादा तेज एवं क्षमतावान हो गए|
पोर्टेबल कम्प्युटर का आकर पहलेसे भी छोटा हो गया जिससे उन्हें आसानी से कहीं भी लाया लेजाया जाने लागा| इनकी कार्य क्षमता पहले से भी बढ़ गयी|
इन्टरनेट ने कम्प्युटर की दुनिया में क्रांति ला दिया| आज सारा विश्व मानों जैसे एक छोटे से कम्प्युटर में समा सा गया है| विश्वजाल (World Wide Web) के जरिये संदेशों एवं जानकारी का आदान-प्रदान बेहद ही आसान हो गया, चंद सेकंड्स में ही दुनिया के किसी भी छोर से संपर्क साधना सम्भव हो सका|
कम्प्युटर की उत्पादन लागत में भारी कमी आने के फलस्वरूप कम्प्युटर की पहुँच घर-घर तक होने लगी है| इनका उपोग हर क्षेत्र में होंने लगा|
इस पीढ़ी का विकासक्रम अभी भी चल रहा है और कम्प्युटर जगत नए-नए आयाम को छूने की ओर अब भी अग्रसर है|
इस पीढ़ी के कम्प्युटर ने अपना आकर बेहद ही कम कर लिया है, पाल्म् टॉप, मोबाइल तथा हैण्डहेल्ड जैसे उपकरण तो अब हमारे हथेली पर समाने लगे है|




कार्य के आधार पर कम्प्यूटर का वर्गीकरण


1. एनालाॅग (Analog Computer)
इसमें विद्युत के एनालाॅग रूप (भौतिक राशि जो लगातार बदलती रहती हैंद्ध का प्रयोग किया जाता है। इनकी गति अत्यंत धीमी होती है। अब इस प्रकार के कम्प्यूटर प्रचलन से बाहर हो गए हैं। एक साधारण घड़ी, वाहन का गति मीटर (Speedo-meter), वोल्टमीटर आदि एनालाॅग कम्प्यूटिंग के उदाहरण हैं।





2. डिजिटल कम्प्यूटर (Digital Computer)
ये इलेक्ट्राॅनिक संकेतों पर चलते हैं तथा गणना के लिए द्विआधारी अंक पद्धति Binary System 0 या 1 का प्रयोग किया जाता है। इनकी गति तीव्र होती है। वर्तमान में प्रचलित अधिकांश कम्प्यूटर इसी प्रकार के हैं।




3. हाइब्रिड कम्प्यूटर (Hybrid Computer)
यह डिजिटल व एनालाॅग कम्प्यूटर का मिश्रित रूप है। इसमें गण्ना तथा प्रोसेसिंग के लिए डिजिटल रूप का प्रयोग किया जाता है। जबकि इनपुट तथा आउटपुट में एनालाॅग संकेतों का उपयोग होता है। इस तरह के कम्प्यूटर का प्रयोग अस्पताल, रक्षा क्षेत्र व विज्ञान आदि में किया जाता है।




आकार के आधार पर कम्प्यूटर का वर्गीकरण 

नोटबुक कंप्यूटर(Notebook Computers)
नोटबुक कंप्यूटर पोर्टेबल कंप्यूटर्स हैं, जो एक छोटी सी जगह में फिट होने के लिए काफी छोटा है, आसानी से चारों ओर ले जाने के लिए पर्याप्त हल्के वजन के है, और प्रभार्य बैटरी के साथ काम करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, ताकि उन जगहों पर भी उपयोग किया जा सके जहां कोई पावर प्वाइंट उपलब्ध न हो। वे आम तौर पर एमएस–डॉस और विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम चलाते हैं, और अधिकतर कमांड प्रोसेसिंग, स्प्रैडशीट कंप्यूटिंग, डाटा एंट्री, प्रेजेंटेशन सामग्री तैयार करने और प्रेजेंटेशन बनाने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
नोटबुक कंप्यूटर के कई मॉडलों को एक नेटवर्क से जोड़ा जा सकता है, ताकि उन्हें नेटवर्क पर अन्य कंप्यूटरों से डाटा (फाइलें) डाउनलोड करने और जब ऐसी ज़रूरत हो, या इंटरनेट तक पहुंच प्राप्त कर सकें। उदाहरण के लिए मोबाइल और अचल कंप्यूटर।



पर्सनल कंप्यूटर(Personal Computers)
एक पर्सनल कंप्यूटर एक गैर पोर्टेबल, सामान्य प्रयोजन कंप्यूटर है, जो आसानी से एक सामान्य आकार के कार्यालय की मेज पर फिट हो सकता है (कुछ लेखन स्थान को लेखन पैड और अन्य कार्यालय स्थिर रखने के लिए छोड़कर), और व्यक्तिगत कंप्यूटर मुख्य रूप से व्यक्तियों की व्यक्तिगत कंप्यूटिंग आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उपयोग किया जाता है, या तो उनके काम के स्थानों में या घरों में।
वे आम तौर पर एमएस–डॉस, एमएस–विन्डोज, विंडोज एनटी, लिनक्स, या यूनिक्स ऑपरेटिंग सिस्टम चलाते हैं, और मल्टीटास्किंग का समर्थन करते हैं, जो उपयोगकर्ता के ऑपरेशन को आसान बनाता है और बहुत समय बचाता है, जब उपयोगकर्ता को दो या अधिक एप्लिकेशन के बीच स्विच करना होता है काम के लिए उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए -IBM PC



वर्कस्टेशन(Workstations)
एक वर्कस्टेशन एक शक्तिशाली डिस्टॉप कंप्यूटर है, जो इंजीनियरों, आर्किटेक्ट्स, और अन्य पेशेवरों की कंप्यूटिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिन्हें अधिक प्रोसेसिंग पावर, बड़ा स्टोरेज और बेहतर ग्राफिक्स डिस्प्ले सुविधा की आवश्यकता है जो पीसी प्रदान करते हैं। वर्कस्टेशन सामान्यतः कम्प्यूटर–एडेड डिजाइन, मल्टीमीडिया एप्लीकेशन और जटिल वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग समस्याओं का अनुकरण और अनुकरण के परिणाम के दृश्य के लिए उपयोग किया जाता है। वर्कस्टेशन आम तौर पर यूनिक्स ऑपरेटिंग सिस्टम चलाते हैं। वर्कस्टेशन के ऑपरेटिंग सिस्टम आम तौर पर एक बहुउपयोगी वातावरण का समर्थन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

मेनफ्रेम सिस्टम(Mainframe Systems)
मेनफ्रेम सिस्टम कंप्यूटर सिस्टम हैं, जो बैंकों, बीमा कंपनियों, अस्पतालों, रेलवे इत्यादि जैसे संगठनों के डेटा और इंफॉर्मेशन प्रोसेसिंग के बड़े पैमाने पर डेटा को संभालने के लिए मज़बूती से उपयोग किया जाता है। इन्हें ऐसे वातावरण में भी उपयोग किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं एक सामान्य कंप्यूटिंग सुविधा, जैसे अनुसंधान समूहों, शैक्षणिक संस्थानों, इंजीनियरिंग फर्मों आदि को साझा करने की आवश्यकता है। मेनफ्रेम सिस्टम के एक विशिष्ट कॉन्फ़िगरेशन में मेजबान कंप्यूटर, फ्रंट एंड कंप्यूटर, बैक–एंड कंप्यूटर, एक या अधिक चक्कर टर्मिनल, कई चुंबकीय डिस्क ड्राइव, कुछ टैब ड्राइव, एक चुंबकीय टेप लाइब्रेरी, कई उपयोगकर्ता टर्मिनलों, कई प्रिंटर और एक या अधिक प्लॉटर हैं, एक विशिष्ट मेनफ्रेम प्रणाली बड़ी फाइल कैबिनेट की एक पंक्ति को दिखती है और एक बड़े कमरे की जरूरत है छोटे कॉन्फ़िगरेशन वाले एक मेनफ्रेम सिस्टम (धीमी मेजबान और घुमंतू कंप्यूटर, कम भंडारण स्थान और कम उपयोगकर्ता टर्मिनल) को अक्सर एक माइक्रो कंप्यूटर प्रणाली के रूप में जाना जाता है। उदाहरण के लिए-IBM 360/370, DEC.



सुपरकंप्यूटर(Supercomputers)
किसी भी समय उपलब्ध सुपरकंप्यूटर सबसे शक्तिशाली और महंगा कंप्यूटर हैं। वे मुख्य रूप से जटिल वैज्ञानिक अनुप्रयोगों के प्रसंस्करण के लिए उपयोग किए जाते हैं, जिनके लिए प्रसंस्करण शक्ति की आवश्यकता होती है, कुछ प्रसिद्ध सुपर कम्पूटिंग अनुप्रयोगों में भूकंपीय डेटा के बड़े संस्करणों का विश्लेषण, एक विमान के आसपास वायु प्रवाह का अनुकरण, एक ऑटोमोबाइल के डिजाइन की दुर्घटना अनुकरण, कॉमक्स संरचना इंजीनियरिंग की समस्याएं, और मौसम पूर्वानुमान मेनफ्रेम सिस्टम की तरह, सुपर कम्प्यूटर मल्टीप्रोग्राफिक का समर्थन करते हैं हालांकि, इन दोनों प्रकार के सिस्टम के बीच मुख्य अंतर यह है कि सुपर कंप्यूटर मुख्य रूप से प्रोसेसर–बाध्य अनुप्रयोगों को संबोधित करते हैं, जबकि मेनफ्रेम सिस्टम इनपुट / आउटपुट–बाउंड अनुप्रयोगों के लिए उन्मुख होते हैं। उदाहरण के लिए CRAY-1, C-DAC’s PARAM.





क्लाइंट–सर्वर कंप्यूटर(Client-server Computers)

क्लाइंट–सर्वर कंप्यूटिंग परिवेश में, क्लाइंट आम तौर पर एक एकल–उपयोगकर्ता पीसी या वर्कस्टेशन होता है, जो अंत उपयोगकर्ता के लिए अत्यधिक उपयोगकर्ता–अनुकूल इंटरफ़ेस प्रदान करता है। यह क्लाइंट प्रक्रियाओं को चलाता है, जो सर्वर को सेवा अनुरोध भेजती है। एक सर्वर आम तौर पर एक अपेक्षाकृत बड़ा कंप्यूटर है, जो एक साझा संसाधन का प्रबंधन करता है और ग्राहकों को साझा उपयोगकर्ता सेवाओं का एक सेट प्रदान करता है। यह सर्वर को प्रबंधित करने वाले संसाधनों के उपयोग के लिए अनुरोध करता है, जो कि सर्वर प्रक्रिया को चलाता है।



1 फ़ाइल सर्वर(File Server): यह नेटवर्क पर कई उपयोगकर्ताओं की फ़ाइलों को स्टोर करने के लिए एक केंद्रीय भंडारण सुविधा प्रदान करता है।


2 डाटाबेस सर्वर(Database Server): यह एक केंद्रीकृत डेटाबेस का प्रबंधन करता है, और नेटवर्क पर कुछ उपयोगकर्ताओं को एक ही डाटाबेस के लिए साझा एक्सेस करने में सक्षम बनाता है।


3 प्रिंट सर्वर(Print server): यह एक या अधिक प्रिंटर का प्रबंधन करता है, और नेटवर्क में किसी भी उपयोगकर्ता से प्रिंट अनुरोध स्वीकार करता है और प्रक्रिया करता है।


4 नाम सर्वर(Name server): यह पुरूषों को नेटवर्क पते में तब्दील करता है, एक दूसरे के साथ संवाद करने के लिए नेटवर्क पर विभिन्न कंप्यूटरों को सक्षम बनाता है।





कम्प्यूटर का परिचय


कम्प्यूटर सामान्य परिचय

वर्तमान समय में कंप्यूटर हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है। इसके बिना किसी भी कार्य को करना असम्भव-सा प्रतीत होता है। यह धीरे-धीरे आधुनिक समाज की आवस्यकता बनता जा रहा है। सभी व्यापारिक संस्थानों, सरकारी संस्थाओं व अन्य प्रतिष्ठानों में कंप्यूटर का प्रयोग अनेकानेक प्रकार से किया जा रहा है; जैसे~ वर्ड प्रॉसेसिंग, डाटा प्रॉसेसिंग इत्यादि। कंप्यूटर के प्रयोग से हम पत्राचार कर सकते हैं, गड़नाएँ कर सकते हैं, साथ ही साथ किसी प्रलेख (Record) को लंबे समय तक सुरछित भी रख सकते हैं। ‘कंप्यूटर’ शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द Computer से हुई है; जिसका अर्थ है~गड़ना करना अथवा गिनती करना।


कंप्यूटर क्या है? ( What is Computer?)

कंप्यूटर एक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक मशीन है जिसे हम कैलकुलेटर, टाइपराइटर तथा टेलिविजन आदि का सम्मिलित रूप में सकते हैं। यह एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जो किसी भी प्रकार के आंकड़ों को व्यवस्थित व नियंत्रित तो करता ही है, साथ ही उन आंकड़ों से सम्बंधित गड़ना भी कम से कम समय में तथा पूर्ण शुद्धता के साथ कर सजता है, उसी प्रकार कंप्यूटर को तुलनात्मक कार्यों के लिए भी प्रोग्राम किया जा सकता है।

कंप्यूटर विभिन्न प्रकार के चित्र व आकृतियां भी बना सकता है। आप इसके माध्यम से संगीत सुन सकते हैं, चल चित्र देख सकते हैं एवं इनकी रचना व निर्माण भी कर सकते हैं। कंप्यूटर के द्वारा आप विभिन्न प्रकार के खेल; खेल सकते हैं; पहेली हल कर सकते हैं तथा शुभकामना कार्ड, बैनर आदि भी बना सकते हैं।

कंप्यूटर की अपनी कोई बौद्धिक छमता नहीं होती। यह केवल दिए गए निर्देशों (Commands) का पालन करके सम्बंधित समस्याओं को हल करता है। यदि निर्देश सही हैं तो इसके माध्यम से परिणाम भी सही प्राप्त होंगे। इस तथ्य को GIGO (Garbage In Garbage Out) भी कहते हैं।

        कम्प्यूटर का इतिहास 

आज आप कंप्यूटर पर इंटरनेट चलाते हैँ, गेम खेलते है, वीडियो देखते हैं, गाने सुनते हैँ और इसके अलावा ढेर सारे ऑफिस से संबंधित काम करते हैं आज कंप्यूटर का उपयोग दुनिया के हर क्षेत्र मेँ किया जा रहा है चाहे वो शिक्षा जगत हो, फिल्म जगत हो या आपका ऑफिस हो। कोई भी जगह कंप्यूटर के बिना अधूरी है आज आप कंप्यूटर की सहायता से इंटरनेट पर दुनिया के किसी भी शहर की कोई भी जानकारी सेकेण्‍डों मे प्राप्त कर सकते हैँ ये किसी दूसरे देश मेँ बैठे अपने मित्रोँ और रिश्तेदारोँ से इंटरनेट के माध्यम लाइव वीडियो कॉंफ्रेंसिंग कर सकते हैँ यह सब संभव हुआ है कंप्यूटर की वजह से। सोचिए अगर कंप्यूटर ना होता तो आज की दुनिया कैसी दिखाई देती।

कंप्यूटर शुरुआत कहाँ से हुई ओर क्यूँ हुई ? क्या वाकई मेँ कंप्यूटर इन सभी कामाें को करने के लिये बना था या इसका आविष्कार किसी और वजह से हुआ था आइए जानते हैँ -

मानव के लिए गणना करना शुरु से ही कठिन रहा है मनुष्य बिना किसी मशीन के एक सीमित स्तर तक ही गणना या केलकुलेशन कर सकता है ज्यादा बडी कैलकुलेशन करने के लिए मनुष्य को मशीन पर ही निर्भर रहना पड़ता है इसी जरुरत को पूरा करने के लिए मनुष्य ने कंप्यूटर का निर्माण किया, यानी गणना करने के लिए।

अबेकस

अबेकस पहला ऐसा कंप्यूटर था, जो गणना कर सकता था। अबेकस का निर्माण लगभग 3000 वर्ष पूर्व चीन के वैज्ञानिकोँ ने किया था। एक आयताकार फ्रेम में लोहे की छड़ोँ में लकडी की गोलियाँ लगी रहती थी जिनको ऊपर नीचे करके गणना या केलकुलेशन की जाती थी। यानी यह बिना बिजली के चलने वाला पहला कंप्यूटर था वास्तव मेँ यह काम करने के लिए आपके हाथो पर ही निर्भर था।

पास्‍कलाइन

अबेकस के बाद निर्माण हुआ पास्‍कलाइन का। इसे गणित के विशेषज्ञ ब्लेज पास्कल ने सन् 1642 मेँ बनाया यह अबेकस से अधिक गति से गणना करता था। ये पहला मैकेनिकल कैलकुलेटर था।

डिफरेंज इंजन

डिफरेंस इंजन सर चार्ल्स बैबेज द्वारा बनाया एेसा यंत्र था जो सटीक तरीके से गणनायें कर सकता था, इसका आविष्कार संस 1822 में किया गया था, इसमें प्रोग्राम स्टोरेज के लिए के पंच कार्ड का इस्‍तेमाल किया जाता था।

इसके आधार ही आज के कंप्यूटर बनाये जा रहे हैं इसलिए चार्ल्स बैवेज को कंप्यूटर का जनक कहते हैँ।



कम्प्यूटर की विशेषतायें 

कंप्यूटर के विशिष्ठ गुण (Specific Characteristics of Computer)

कंप्यूटर की अपनी कुछ मुख्य विशेषताएँ अथवा गुण होते हैं, जिनके कारण उसकी विशेष महत्ता है। कंप्यूटर के विशिष्ठ गुण अग्रलिखित हैं~

गति (Speed)~ कंप्यूटर अपने प्रत्येक कार्य को अत्यधिक तेज गति से करता है। यह पलक झपकते ही गुणा/ भाग या जोड़/ घटाने आदि से सम्बंधित लाखों संक्रियाएँ कर सकता है। एक आधुनिक कंप्यूटर यदि उचित प्रोग्राम द्वारा कार्य कर रहा हो तो वह लगभग तीस लाख संक्रियाएँ एक साथ कर सकता है। मनुष्य के लिए समय की सबसे छोटी इकाईयां; जैसे~ मिली-सेकंड, माइक्रो-सेकंड, नैनो-सेकंड तथा पिकोसेकेंड आदि का प्रयोग किया जा सकता है।



शुद्धता (Accuracy)~ कंप्यूटर अपने कार्य को बिना किसी त्रुटि के करता है।कंप्यूटर स्वयं कबि त्रुटि नही करता। यदि कहीं त्रुटि की आशनका रहती भी है तो वह हमारे द्वारा या तो डाटा डालते समय अथवा प्रोग्राम देते समय होती है। कंप्यूटर अपने कार्य को सदैव एक ही प्रकार से करता है। साधारणतः सभी कंप्यूटर 38 अंकों वाली संख्याओं से सम्बंधित किसी भी प्रकार की संक्रिया बिना किसी त्रुटि के क्र सकते हैं।


सार्वभौमिकता (Universality)~कंप्यूटर का आज सारी दुनिया में व्यापक रूप से प्रयोग किया जा रहा है। यह केवल जटिल गणितीय कार्यों के लिए ही नहीं, अपितु अनेक व्यवसायिक व अन्य कार्यों के लिए; जैसे~टेलीफ़ोन की लाइन जोड़कर संचार के माध्यम को विस्तृत करना, तरह-तरह के खेलों को डालकर मनोरंजन करना आदि के लिए भी प्रयोग किया जाता है। इंटरनेट की सुविधा ने तो दुनिया को समेटकर और भी छोटा कर दिया है।



स्वचालन (Automation)~ कंप्यूटर अपने कार्य लगभग स्वचालित रूप में ही करता है। इसका अभिप्राय यह है कि कंप्यूटर से कार्य कराने के लिए हमे कुछ निर्देश मात्र देने की ही आवश्यक्ता होती है। आगे की कार्यविधि का संचालन एवं परिणाम का निर्धारण वह स्वयं करता है।


सछमता (Capacity)~ कंप्यूटर बिना थके तथा ऊबे हुए उपयुक्त वातावरण मिलने पर 24 घण्टे और 365 दिन लगातार कार्य कर सकता है।



संग्रहण छमता (Storage Capacity)~ कंप्यूटर की संग्रहण छमता भी बहुत अधिक होती है। एक समय में ही यह अत्यधुनिक सूचनाओं का संग्रहण कर सकता है। कंप्यूटर में डाटा को संग्रहित करने के लिए विभिन्न प्रकार के डिवाइसेज; जैसे~हार्ड डिस्क, फ्लॉपी डिस्क, सी०डी० आदि का प्रयोग किया जाता है। कंप्यूटर की संग्रहण छमता को नापने के लिए अनेक मानक इकाइयों का प्रयोग किया जाता है।



कम्प्यूटर की सीमाएं


बुद्धिमता की कमी (Lack of Intelligence) -

कम्प्यूटर एक मशीन है । उसमें मनुष्‍‍‍य के समान बुद्धिमता (Intelligence) नहीं है यह केवल यूजर द्वारा दिये गये निर्देशों का पालन करता हैं, किसी भी स्थिति में कंप्‍यूटर न तो दिये गये निर्देशों से कम काम करता है



सामान्य बोध की कमी (Lack of Common Scene)
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यह भी जानना जरूरी है कि कंप्‍यूटर कभी कोई गलती नहीं करता है, लेकिन अगर यूजर उससे गलत काम लेता है तो उसे इसका सामान्य बोध यानि Common Scene नहीं हाेता है अगर आपने कंप्‍यूटर को बताया नहीं है "सीमा एक लडकी है" तो वह उसे by default लडका ही मानेगा, उसे नाम में फर्क करना नहीं आता है, Computer एक बुद्धिमान मशीन नहीं है यह सही या गलत कि पहचान नहीं कर पाती है|



विद्युत पर निर्भरता (Dependence on electricity) -
कंप्‍यूटर को काम करने के लिये विद्युत ( electricity) की आवश्‍यकता होती है बिना विद्युत ( electricity) केे कंप्‍यूटर एक धातु के डब्‍बे से ज्‍यादा और कुुछ नहीं है


अपग्रेड और अपडेट (Upgrade and Update) -
कम्प्यूटर एक ऐसी मशीन है जिसे समय समय पर अपग्रेड और अपडेट (Upgrade and Update) करना होता है यदि ऐसा नहीं किया तो कंप्‍यूटर ठीक प्रकार से कार्य नहीं कर पाता है



वायरस से खतरा (Virus threat) -
कंप्‍यूटर को हमेशा वायरस का खतरा बना रहता है, एक बार वायरस आने पर यह कंप्‍यूटर ऑपरेटिंग सिस्‍टम के साथ उसमें सुरक्षित फाइलों को भी नुकसान पहॅुचा सकता है


CCC syllabus in hindi

CCC full form Course on Computer Concepts इसके नाम से ही स्पष्ट है कि यह एक ऐसा course जिसे करने (सीखने) से आपको computer के basic concepts (Operating System, MS Office, Internet and Multimedia) की knowledge हो जाती है.

CCC other basic courses से अलग इसलिए है क्योंकि CCC एक govt. certified computer course है जिसे एक govt. संस्था NIELIT (National Institute of Electronics & Information Technology) के द्वारा संचालित (run) किया जाता है.

 NIELIT का ही पुराना नाम DOEACC था।


Ccc syllabus in hindi 


CCC  सिलेबस 8 भागो में बटा है जो 80 घण्टे का कोर्स है इसे हम 40 से 60 दिन में इस ब्लॉग पर कवर करेंगे।
10 फरवरी से क्लास शुरू होंगी।

1 कम्प्यूटर का परिचय (Introduction To Computer)
परिचय 
कंप्‍यूटर क्‍या है 
कंप्यूटर का इतिहास 
कंप्यूटर की विशेषता (Characteristics of Computer)
कंप्यूटर की सीमाएं - Limitations of Computer in Hindi
कंप्‍यूटर का वर्गीकरण 
कंप्यूटर की पीढ़ी - computer generations
कार्य पद्धति आधार पर कंप्‍यूटर का वर्गीकरण
आकार के आधार पर कंप्यूटर के प्रकार
कंप्‍यूटर के सामान्‍य अनुप्रयोग 


कंप्‍यूटर की संरचना (Computer Architecture in Hindi)
सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (सीपीयू)
कीबोर्ड, माउस
इनपुट डिवाइस 
आउटपुट डिवाइस 
कंप्‍यूटर मैमोरी 
हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर 
हार्डवेयर 
सॉफ्टवेयर 
एप्‍लीकेशन सॉफ्टवेयर 
सिस्‍टम सॉफ्टवेयर 
प्रोग्रामिंग भाषायें 
डेटा/सूचना का रिप्रजेण्‍टेशन 
डेटा प्रोसेसिंग 
IECT के कॉन्‍सेप्‍ट 
ईगवर्नेस 
मल्‍टीमीडीया और मनोरंजन 




2  जीयूआई आधारित ऑपरेटिंग सिस्‍टम परिचय (Introduction To GUI Operating System)
परिचय 
उद्ददेश्‍य 
ऑपरेटिंग सिस्‍टम के बेसिक 
ऑपरेटिंग सिस्‍टम 
लोकप्रिय ऑपरेटिंग सिस्‍टम 




यूजर इंटरफेेस 
टॉस्‍कबार 
आइकन 
स्‍टार्ट मेन्‍यू 
एप्‍लीकेशन को रन करना 
ऑपरेटिंग सिस्‍टम की सिम्‍पल सेंटिग 
डिस्‍पले प्रॉपर्टीज को बदलना 
डेट और टाइम को बदलना 
विण्‍डोज कंम्‍पोनेंट 





3  शब्द संसाधन के तत्व (Elements of word processing)





4  स्प्रेडशीट (Spreadsheets)




5 कम्प्यूटर संचार एवं इंटरनेट (Computer communication and internet)
WWW तथा वेब ब्राउज़र (WWW and web browser)



6 संचार एवं सहयोग (Communication and cooperation)



7  छोटे प्रस्तुतीकरण का निर्माण (Creation of small presentations)



8 डिजिटल वित्तीय सेवाये एवम एप्लिकेशन



सीहोर यात्रा

 लोग कहते हैं जब भगवान की कृपा होती है तो बाबा बुला ही लेते है। बस ऐसा ही मेरे साथ हुआ। मैं बड़ी माँ के यहाँ गया था ( बड़ी माँ और मैं एक ही शह...